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By Babulal Sankhla Saini Babu
मैनें बन पिता पहचानापिता के दर्द को।
By Ajita Bansal
जिंदगी को हमेशा उसने ही जिया है,जिसने बंदिशे देखी हो खुद के ऊपर|
By Dr. Sulagna Bhowmick
पुष्प तुम सुन्दर हो वर्ण विपुल सुगंधमयतुम्हारे सौम्य स्वरूप से
By Sanjeev Kashyup
वो आए फिर कल रात, ऊंघती आंखों के आइने में
By Prashant Mahato
एक ज्वार सा उठने लगा अब,भृकुटियाँ सबने तानी है,
By Vedant Bhardwaj
जब ये जिस्म आया आया था,तब हुई थी ख़ुशियों की बात,जब ये जिस्म गया तो हुई आँसुओं की बरसात।
By Kamal Khanagwal
क्या सोचता है तू कि तुझे जन्नत नसीब होगी नासमझ तू ये सोच कि तेरी मय्यत भी कैसी होगी,
By Chetna
बारिश, तुम अगर शहर चुनो तो इस बार उसके शहर जाना!!बादलों को देख वो इतराएगी, शरमाएगी, दिखाएगी खुशी;
By Poonam Jagtap
यकींन!! उसका सफर आसान नहीं होता, जो करे अपने आप पर वो कभी नाकामीयाब नहीं होता !
By Janhavi Verma
रंगीन जग को रंगों की कदर सीखा न पाया,सावले रंग को जग ने खामी ठहराया,
By Purba Banerjee
मैं जितनी बड़ी हो रही हूंमेरी सोच उतनी छोटी हो रही है।
By Dr Manu
धरती की ये तपिश मिट जाएगीफूलों की कलियाँ भी खिल जाएँगी
By Ayushi Singh Baghel
रंग एक, ढंग एकचाल एक, चलन एकएक रूप, रेखा एकभेद कहाँ ?
By Jinal Shah
राहों से पूछ लेना कि मंज़िल कौन सी है, ’गर कोई तख्ती ना मिले तो।
By Shubham Singh
मुश्किल राह पर चलने की मैंने थी ठानी,राज तिलक की थी तैयारी|
By Aqdas Mujtaba
अचानक ख़याल आता है मुझे एक रातआसमानों में से कौन है जो मुझे देखता हैऐसी हसरत भरी आँखों से
By Harshendra Thakur
मेरा रोना भी एक कविता था। मेरी किलकारी मे था एक गाना।
By Kunal Khatri
शिक़ायत है!चल आ बैठ मैं सुनता हूँ तुझे..
By Rajesh Singh Bisht
मैं... कह दूँ क्या कहानी प्रिये,चल दूँ क्या... साथ प्रिये?
By Abhishek Pandeyar
मैंने अपनी माँ के चरणों में भगवान को देखा हैअपने सपनों को उसकी आँखों में खिलते सदाबहार देखा है
By Nadia Makharia
गाड़ियों की आवाज़ों सेशाम को तो चटखारों से
By Priyanka Dixit
बचपन की वो मीठी बातें,चंचल सी सुबहें, सुकून की वो रातें।
By Vinay Bhandari
जिस घर लक्ष्मी जी आती हैवो बेटी होती है।
By Deepti Sharma
मान, सम्मान से मिलवाने वाला अपना ,मान ढूँढता है |
By Mannaa Bahadur
जो बोले ना, ख़ामोश रहे,उसके मन में भी बातें हैं।
By Vijeta Pachpor
बचपन में जो बंधन लगते थे आज वो बंधनों को जीना चाहती हूँ माँ
By Shekhar Vats
मैं भारत भूमि निवासी, धर्म सनातन विश्वासी हूँ।युगों युगों से यहाँ बसा हूँ, नहीं आप्रवासी हूँ।
By Kankana Karmakar
সেদিন তারও ওয়েবসাইটটি খুলছিল না,“আমার কী যাদবপুর এ হবে মা?”,“অনেক খেটেছিস, কেন হবেনা?”,
By Bhargavi Arora
ज़िन्दगी खुशगवारी की कहानी नहीं हैजिद्दोजह्द से पहले रवानी नहीं है
By Kumar Aman
ਸਾਦਗੀ ਦੀ ਬੁੱਕਲ ਮਾਰਕੇ,ਜਿਹਨੇ, ਇੱਜਤ ਕੱਜੀ ਏ।ਇੱਕ ਦਿਲ ਨੂੰ ਲੱਗੀ ਏ।