बेदाग़ – Delhi Poetry Slam

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बेदाग़

By Jinal Shah

राहों से पूछ लेना कि मंज़िल कौन सी है, ’गर कोई तख्ती ना मिले तो।
अकेले चलते जाना, छांव भी धूप सी है, ’गर कोई संग़ी ना मिले तो।
खुदा से ना करना कभी शिकायत कोई तुम 
रखना ना दिल में गिले-शिकवों का कोना कोई तुम
पहचान होगी तुम्हारी, तुम्हारे बेदाग़ दिल से।
वफ़ा करना बस, ख़फ़ा न करना किसी को कभी तुम।


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