बारिश – Delhi Poetry Slam

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बारिश

By Dr Manu

धरती की ये तपिश मिट जाएगी
फूलों की कलियाँ भी खिल जाएँगी 
ऐ बारिश जब तू आएगी,
मिट्टी की वो सोंधी सी ख़ुशबू , हवा में इस कदर मिल जाएगी,
कि जी चाहेगा, उठा के थोड़ी रख लूँ ,
लेकिन बेसब्र मन कहेगा , थोड़ी अभी चख लूँ ।।

तेरे आने से पहले मोरों का वो नाच ,
तुझे देख सूरज की वो घटती सी आँच ।
तेरा संदेश पाकर पक्षियों का वो गीत गाना,
मन को कितना भाता है तेरे आने पर वो मौसम सुहाना ।।

वो लिफाफा रखा है बीजों का भरा, तू आएगी तभी बिजाई होगी।
तू लाएगी साथ पानी अपने, तभी तो सिंचाई होगी ।
जाने कितने अंकुर फूटेंगे जब तू आएगी,
एक एक डाली को दुल्हन सा तू ही तो सजाएगी।।

दफ़्तर में एक ने कहा, बारिश आए तो चाय पकौड़े खाएँ,
धीमे धीमे गाने बजाकर, कहीं लोंग ड्राइव पर जाएँ ।
बारिश आएगी तो छुट्टी का बहाना मिल जाएगा 
बच्चों ने कहा, भीगते हुए कौन ही स्कूल जाएगा ।
बालकोनी में बैठकर ताश खेलेंगे , लेंगे बारिश का मजा,
मनोरंजन का इससे अच्छा साधन क्या ही होगा भला ।।

ऐ बारिश इस बार थोड़ा ठहर के आना,
नुक़सान थोड़ा कम ही कर के जाना ।
आमदनी बहुत कम ही हुई है इस साल,
क्या खाएँगे? दूर एक झोपड़ी में उठा था सवाल ।

एक ने कहा, बारिश में लकड़ियाँ भीग जाएँगी,
दूसरा बोला, घरों की मरम्मत भी कहाँ हो पाएगी ।
बारिश में तो छत भी टपकेगी, तीसरे ने कहा,
मन में सोचा चौथे ने, वो क्या करेंगे , छत ही नहीं है जहाँ ।।

लगता है बारिश आ गई है ,
पकौड़ों की ख़ुशबू आ रही है
मिट्टी की मीठी सी महक भी छा रही है ।

ज़रूर छत भी टपक रही होगी कहीं,
कहीं वरदान, कहीं अभिशाप, क्या ये है सही?
ऐ बारिश! एक सा ख़याल रखा कर सबकी ज़रूरतों का,
ताकि सब करें स्वागत तेरा दिल खोलकर किन्हीं शुभ मुहूर्तों सा।।


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