ए सखी अब चलना होगा.. – Delhi Poetry Slam

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ए सखी अब चलना होगा..

By Veena Dabas 

(दोस्ती का रिश्ता एक अनमोल रिश्ता है। 
पर दोस्त हमेशा साथ नहीं रहते।
सभी आगे बढ़ जाते हैं, अपने जीवन में व्यस्त हो जाते हैं।
बस दिल में रह जाती है एक दूसरे के साथ बिताये खूबसूरत पलों की यादें और फिर मिलने कीउम्मीदें)

हँसते गाते बीत गए ये पल, कुछ लम्हे बिखरे, कुछ यादें सिमटी। 
पर आज इन लम्हों से गुजारिश है, ज़रा थम थम के बिखरे।
यारों की बातें अभी बाकी है, कुछ अधूरी सी मुलाकाते अभी बाकी है।
पर वक्त का तकाजा है, अब न इनका थमना होगा।
ए सखी, अब चलना होगा, ए सखी अब चलना होगा।

चलने से पहले कुछ पल तो ठहरे जाए, आ सखी कुछ यादें बनाएँ।
कुछ तुम अपनी कहो कुछ, हम अपनी सुनाए।
फिर इस शाम का भी ढलना होगा, और न जाने फिर कब मिलना होगा I
ए सखी अब चलना होगा.. ए सखी अब चलना होगा।

चल चलें इस वादे के साथ, कुछ यादों के साथ कि मिलेंगे एक नए मौसम नए मोड़ पर
जहाँ ना वक्त का कोई पहरा होगा।
जो किस्से अधूरे रह गए, वह फिर से कह लेंगे। जो लम्हे पीछे छूट रहे है वो फिर से जी लेंगे।

माना कि इस दौर में कुछ बात है, दोस्तों का साथ है।
पर मुझे यकीन है, मेरे दोस्त, कि वो मोड़ भी बहुत खूबसूरत होगा… कि वो मोड़ भी बहुत खूबसूरत होगा। ए सखी, अब चलना होगा, ए सखी, अब चलना होगा।


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