कुछ ही पन्ने – Delhi Poetry Slam

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कुछ ही पन्ने

By Ved Mishra

कुछ ही पन्ने बचे हैं अब, थोड़ा ध्यान से लिख लेना।
पढ़ने को बहुत हैं, सबके लिए अच्छा लिखना।
दिल दुखाया है जिसने भी, बात उलट के लिखना,
शिकायतें कम, शुक्रगुज़ारी ज़्यादा ही लिखना।

घाव कम, लगाव ज़्यादा ही लिखना,
लब काँपते हों जहाँ... वो बातें सब्र से लिखना।
किसी का भला नहीं, तो बुरा भी मत लिखना,
दिमाग से नहीं, बस दिल की ही लिखना।

उलझनें सारी सुलझ गईं... ये झूठ भी लिखना।
कुछ ही पन्ने बचे हैं अब, थोड़ा ध्यान से लिख लेना।


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