हार – Delhi Poetry Slam

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हार

By Vaibhavv Malhotra

एक हार जो शब्दों के मोतियों से पिरोया था वह आज उन्हें उपहार दिया।
चुपके से दिल के कोने में छुपा कर रख लिया उन्होंने, पहना ना तिरस्कार किया।

यूं तो नयन बयां करते थे दिल का हाल, आज शब्दों में भी बयान किया।
वह होठों से कुछ कह ना सके उनकी मोन आंखो ने इनकार किया।
एक हार जो शब्दों के मोतियों से पिरोया था वह आज उन्हें उपहार दिया ।
चुपके से दिल के कोने में छुपा कर रख लिया उन्होंने, पहना ना तिरस्कार किया।

यूं तो मान चुके हैं थे कि गैर है वह आज उनकी यादों को भी आजाद किया।
रूठे ना हमारी बात सुनकर इसलिए भुला देंगे उनको यह झूठा उन्हें विश्वास दिया।
एक हार जो शब्दों के मोतियों से पिरोया था वह आज उन्हें उपहार दिया।
चुपके से दिल के कोने में छुपा कर रख लिया उन्होंने, पहना ना तिरस्कार किया।


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