ज़िंदगी का सफ़र – Delhi Poetry Slam

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ज़िंदगी का सफ़र

By Umang Agarwal

आज मेरी पचासवीं वर्षगांठ है।
५० वर्ष – सुनने में कैसा लगता है न !
एक लंबा सफ़र
पर मेरे लिए -
मुझे तो जैसे सब कल की ही
बात लगती है।
लगता है मानों
अभी तो माँ ने मेरा छोटा सा हाथ पकड़ कर
मुझे चलना सिखाया था।
उसी कोशिश में मैं चला था, गिरा था
और माँ ने दौड़ कर मुझे उठाया, और
सीने से लगाया था।
इसी तरह गिरते – संभलते
मैं बड़ा हुआ और मैंने
दुनिया को एक भरपूर नज़र से देखा।
ज़िंदगी के उस हसीन मोड़ पर आकर
मुझे तुम्हारा साथ मिला।
तुम्हारा हाथ जो हमेशा मेरे साथ रहा
और हर अच्छे – बुरे वक़्त में
मेरी ताक़त बना।
और मानों तभी मैंने बड़प्पन की ओर
पहला कदम रखा।
हाँ। हमारे प्यार की निशानी
हमारी प्यारी सी बेटी पाकर।
और मैं तो जैसे आसमान में उड़ने लगा।
ज़िंदगी चलती रही
समय बीतता रहा
और मैं भी वक़्त के हाथों कठपुतली बना
कभी इस छोर, तो कभी उस छोर
घूमता रहा।
और फिर एक दिन आया
जब आँखों में पानी लिए
अपनी प्यारी बेटी को विदा किया।
वो दिन भी क्या दिन था
मन में ख़ुशी थी
पर आँख से आँसू बह रहे थे।
दिल में उमंगें थीं
पर जज़्बात पर क़ाबू नहीं था।
और फिर एक – एक कर
दोनों बेटियां अपने घर चलीं गईं
और समय का चक्र यूँ ही चलता रहा।
आज मैं पचास वर्ष का हूँ।
ज़िंदगी पर एक नज़र डालता हूँ
और सोचता हूँ कि
इन ५० वर्षों में मैंने
क्या खोया और क्या पाया।
अच्छे दिनों को याद कर
चेहरे पर मुस्कान आती है
तो बुरे दिनों की सोच
रोने को मन कर आता है।
और फिर सुनायी पड़ती है मुझे
अपने नन्हे नातियों की
प्यारी – मीठी सी आवाज़
और उसे सुन
मेरा अंग – अंग पुलक उठता है।
प्रश्न यह नहीं –
कि मैंने ज़िंदगी में
क्या खोया – क्या पाया
यह भी नहीं
कि कितने अच्छे दिन देखे
और कितने बुरे दिन आए
बात सिर्फ़ इतनी सी है
कि आज मैं क्या हूँ
मेरे पास सब कुछ है
जो मैंने चाहा, मुझे मिला
प्यार, इज़्ज़त, ख़ुशी
सब कुछ मुझे भगवान ने दिया
आज मैं ५० वर्ष का हूँ
और उम्र के इस मोड़ पर खड़ा
आज मैं खुश हूँ – बहुत खुश हूँ।


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