तू बस चलता रह – Delhi Poetry Slam

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तू बस चलता रह

By Teena Mahato

तू बस चलता रह,
मुसीबतों का भय छोड़,
अपने लक्ष्य पर अडिग रह,
और आगे बढ़ता रह।

हर बार जैसा सोचा,
समय वैसा ही होगा,
इस भ्रम से दूर रह,
तू बस चलता रह।

सत्पथ पर चलता रह,
सारी कोशिशें नाकाम होंगी,
ऐसी चिंताओं से दूर रह,
तू बस चलता रह।

जो साथ हैं आज तेरे,
वो कल भी साथ होंगे,
इस उम्मीद में मत रह,
तू बस चलता रह।

जो हँसे, उन्हें हँसने देना,
साथ तू भी हँस लेना, पर
अपने लक्ष्य का ध्यान रहे,
इस बात का ख्याल रखना।"

तू बस चलता रह,
गिरता, संभलता,
आगे बढ़ता रह।


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