मेरे अपने – Delhi Poetry Slam

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मेरे अपने

By Suman Chauhan

विवाह की खुशियाँ तोड़ गई सपने 
जो सोचा था उसके उल्ट हो गए अपने 
लगा कि ससुराल में मिलेंगे अपने 
परंतु मार दिए उन्होंने भी मेरे सपने!
रात-दिन काम करवाएं मेरे अपने 
सोचा पति करेगा मेरे पुरे सपने 
पति ढूंढने में भी गलत थे अपने 
मार-मारकर तोड़ दिए मेरे सारे सपने! 
दुखी आकर खुदखुशी लगी थी करने 
रुक गयी क्योकि बच्चे थे मेरे अपने 
सोचा अब यह करेंगे मेरे पुरे सपने
बदकिस्मती से उन्होंने छोड़कर मुझको 
तोड़ दिए मेरे सारे सपने!
बूढ़ी हो गई तब भी सोचु सारे अपने 
अब भगवान करेगा मेरे पुरे सपने 
अब मर गई तो रोए मेरे अपने 
अब क्या फ़ायदा जब अधूरे रह गए मेरे सपने!!


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