मैं तुमसे सीख रहा हूं – Delhi Poetry Slam

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मैं तुमसे सीख रहा हूं

By Sudhir Tomar

हर वर्ष की भाँति इस वर्ष शिक्षक दिवस --2024 के पावन अवसर मैंने एक कविता की रचना की है-ये कविता समस्त शिक्षको के साथ-साथ उन सभी साथियो को समर्पित है जो आज के इस प्रतिस्पर्धी युग में या तो स्वयं विद्यार्थी है या अपने बच्चों को अध्यन हेतु विद्यालय भेज रहे हैं।

''मैं तुमसे सीख रहा हू''

मैं तुमसे सीख रहा हूँ,
क्या और कैसे तुम्हे पड़ाऊ।।
तुम्हारे उलझे सवालो के
उत्तर कैसे तुम्हे समझाऊ
मै तुम्हे डांट नही सकता
झिड़क नहीं सकता, "फिर आना"
कहकर टाल नहीं सकता.

मैं तुमसे सीख़ रहा हूँ,
क्या औऱ कैसे तुम्हें पढ़ाऊं।।

तुम सब अलग-अलग अद्वितीय हो
तो मैं एक ही तरीक़े से
तुम सबको कैसे पढ़ाऊँ,
किसी को आरम्भ तो किसी को अन्त,ठीक से समझ नहीं आया,
तो मैं आगे कैसे बढ जाऊं,

मैं तुमसे सीख रहा हूँ,
क्या और कैसे तुम्हे पढ़ाऊं ||

किसी के घर मे शादी थी,
तो किसी का था कोई त्यौहार,
किसी के घर में कोई बीमार था,
तो था कोई खुद ही बीमार,
तुम सबको साथ लिए बग़ैर,
मैं कैसे आगे पाठ पढ़ाउं।।
तुम्हारा चेहरा ,तुम्हारी आँखे
जब ये कहती है ,आज कुछ
समझ नहीं आ रहा,तो सिर्फ
तुम्हारी" यस सर " सुन
बात आगे कैसे बढ़ाऊं।

मैं तुमसे सीख रहा हूँ,
क्या और कैसे तुम्हें पढ़ाऊँ।।

तुम स्कूल ,कोचिंग के जाल में उलझे हो,कभी पढते में सोते,
तो कभी सोते में पढ़ते हो,
होमवर्क पूरा न कर पाने पर कैसे डाट लगाऊँ।
मैँ तुमसे सीख रहा हूँ,
क्या और कैसे तुम्हे पढ़ाऊं।।
तुम सब मेहनती हो इस पढाई के
दबाव के चलते अपने शौंक व इच्छाओँ की तो बात ही क्या चैन से सो भी नहीं पाते हो,
फ़िर क्यों ना,मैं तुम्हे तुम जैसा बन समझू और समझाऊं।

मै तुमसे सीख रहा हूँ,
क्या और कैसे तुम्हे पढ़ाऊं।।ं

तुम सजग हो,आगे बढ़ना चाहते हो,
परीक्षा की आपा-धापी में स्वयं
को खोया पाते हो,
तुम परीक्षा के लिए बने हो या
परीक्षा तुम्हारे लिए,
अक्सर समझ नहीं पाते हो।

मैं तुमसे सीख रहा हूँ,
क्या और कैसे तुम्हे पढ़ाऊं ।।

मैं गुरु हूँ,एक लकीर खेचता हूँ,-
आगे बढ़ो
रास्ता बताता हूँ--बढे चलो।
सवालो के उत्तर मिलने तक रुको नहीं।
याद रखो-परीक्षा तुम अकेले नहीं दोगे,वो मेरी भी परीक्षा है।
जीवन के रणक्षेत्र में तुम सबको
अकेले ही संघर्ष करना है,
पर मैं तुम सबमे,सबके साथ हूँ|
तुम अकेले भी सफल हो सकते हो
पर मैं,तुम सबके सफल होने पर ही सफल होऊँगा।

मैं तुमसे सीख रहा हूँ।
क्या और कैंसे तुम्हे पढ़ाऊं ।


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