नया नियम – Delhi Poetry Slam

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नया नियम

By Somya Singh

उपयोगिता बना रिश्तों का नियम नया,
इस बात से मन का दिल भर गया।
ये तथ्य जज़्बातों में सूराख़ कर गया,
वो सूराख़ मासूमियत की क़ब्र बन गया।

हर झूठ सच और सच झूठ बन गया,
हर सच पर मज़ाक़ का लेप जो लग गया।
स्पर्धा भाव लफ़्ज़ों को बेपर्दा कर गया,
वर्ण और इरादों का विच्छेद कर गया।

कुछ खोखला-सा जिस्म में घर कर गया,
ये समाचार रूह को ऐसे गर्द कर गया।
पर ये तथ्य नम्रता को निर्मम नहीं बना पाया,
इंसानों में जज़्बातों का वध नहीं करा पाया।

इंसानियत के अंश को मिटा कर नहीं मिटा पाया,
नेकी के फूल को गुलशन से नहीं हटा पाया।
छोटी-छोटी खुशियों का शुक्राना नहीं मिटा पाया,
उम्मीद को व्यक्तित्व से बेदख़ल नहीं करा पाया।

व्यक्ति को महज़ इस्तेमाल की वस्तु नहीं बना पाया,
नए नियम से दिल का रिश्ता जो नहीं बना पाया।


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