शादी की बात – Delhi Poetry Slam

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शादी की बात

By Snehjyoti Chaprana

शादी की जब बात चली तो 
लाखों सवाल उठने लगे
लड़का -लड़की की ख्वाहिश पे
सब कान धरने लगे
कौन पैमाने पे खरा उतरेगा
यही सवाल करने लगे
रिश्तों के भँवर में रोज़
नए ट्विस्ट रचने लगे…..

लड़के को भी लड़की
कामकाजी चाहिए
घर सम्भालने के लिए
दो नहीं चार हाथ चाहिए
दुनिया दारी के पटल की
पूरी तस्वीर होनी चाहिए
कंधे से कंधा मिलाकर चले
ऐसी एक जीवन निधि चाहिए…..

लड़की ने भी तोड़ी हर रीत
आगे बढ़ मिटा दी हर लकीर
अब घर नहीं घर से बाहर का भी
हिसाब मुझे चाहिए
मेरी पसंद का लड़का
मुझे मेरे साथ चाहिए …..

पुरानी रीति छोड़ नई सोच
नए रिश्तों का एहसास चाहिए
माँ-बाप जितना ना सही
थोड़ा सा मान और दुलार मिल जाए
ऐसा घर मुझे मेरे आज में चाहिए
शादी की जब बात चली तो
लाखों सवाल उठने लगे
लड़का-लड़की भी अब अपनी
फ़रमाइश का बखान करने लगे ।।


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