गेहराईया – Delhi Poetry Slam

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गेहराईया

By Smita Jape

गेहराइयों मे नही दर्द का दौर
आईने भी झुठ बोलने लगे है

नजारे दिलकश गंदगी से भरे
महेंगे कपडे इत्र से आलमारिया भरे

दिमाग लडानेकी फुरसत नही
बहते है, धारा नादिया की

दिल को कोई बात छू नही जाती
अफसोस मौत भी तमाशा है बनी

नये जमाने दोस्ती 'तेरी, मेहंगी बडी
खोयी पहचान खंडरोंने, आंख मे ना आसू कोई
गेहराइयों मे नही दर्द का दौर
आईने भी झुठ बोलने लगे है

नजारे दिलकश गंदगी से भरे
महेंगे कपडे इत्र से आलमारिया भरे

दिमाग लडानेकी फुरसत नही
बहते है, धारा नादिया की

दिल को कोई बात छू नही जाती
अफसोस मौत भी तमाशा है बनी

नये जमाने दोस्ती 'तेरी, मेहंगी बडी
खोयी पहचान खंडरोंने, आंख मे ना आसू कोई


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