जीने की खूबसूरती – Delhi Poetry Slam

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जीने की खूबसूरती

By Shrikant Bhat

था जवाब एक पल में, हम उलझे रहे कल में।
बस खोते ही गए, कुछ पाने के छल में।
गुरूर को ही अपने, कुछ ऐसे हवा दी।
जीने की खूबसूरती, हमने जीने में गँवा दी।।१।।

फिक्र इस बात की थी, कि सबको कैसे समझाएं।
इसी एक कोशिश में, खुद को रखा उलझाए।
ख़याल में ही सबके, अपनी ज़िंदगी भुला दी।
जीने की खूबसूरती, हमने जीने में गँवा दी।।२।।

जो ढूंढ रहे थे बाहर, वो तो था बगल में।
रौनक जो समझ रहे थे, छलावा था असल में।
ज़मीन से कई दूर, ऊंचाई आसमान तक बढ़ा दी।
जीने की खूबसूरती, हमने जीने में गँवा दी।।३।।

आओ कुछ जीना सीख लें, हर पल में रहना सीख लें।
दूसरों से कम, अपने आप से तो निभाना सीख लें।
फिर ना कहना ज़िंदगी भर, यूंही ज़िंदगी उलझा दी।
जीने की खूबसूरती, हमने जीने में गँवा दी।।४।।


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