याद – Delhi Poetry Slam

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याद

By Seema Pednekar

पता है कल मुझे कौन मिलने आया?
वो बरसात की रात जब तुमने मेरे लिए गाना गाया था,
उसके पीछे आई सर्दियों की कई गुलाबी सुबहें,
मैं बैठी रही उनके साथ, पता नहीं चला कि इन यादों का क्या करूँ,

यादें अपने साथ लायीं वो सब शामें जब तुमने अपने कैनवास पर मुझे उतारा था,
तुम्हारी पसंदीदा खाने, अदरक की चाय, बिस्कुट का वो पैकेट और रातों को वो गले लगाकर सोना,
सबने पूछे उन्होंने कई सवाल, और मैं भी बैठी रही उन सवालों के साथ,

आखिर में सबको याद आईं हमारी खाली आँखें, रातें और ऐसे कई दिन जिसमें हम नहीं थे,
आँखें जिसमें मैं नहीं, पर मेरे नाम से उठने वाला दर्द मिला, कैसे नज़रअंदाज़ करती उस दर्द को और सामने बैठे खाली शख्स को...

बताओ कैसे रोकती तुम्हें मेरे साथ, प्यार अगर समर्पित करना सिखाता है तो मुक्त कराना भी जानता है,
कर दिया फिर मुक्त प्यार को खुली साँस लेने के लिए।

यादें आज आई हैं, कल चली जाएँगी, जाते वक्त उन्हें बता दूँगी कि इस किनारे को अब साहिल का इंतज़ार नहीं है।


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