टूटा हुआ गुलाब – Delhi Poetry Slam

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टूटा हुआ गुलाब

Saraswati Behera

खोई नहीं है रंगत तो क्या
 महक से छूटा नहीं संगत तो क्या
  
  अडिग है अपने अस्तित्व पर
  गर्वित है अपने सौभाग्य पर
 
 कोई समझे या न समझे उसके ख्वाब 
 बेचारा सा वो टूटा हुआ गुलाब


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