किरदार – Delhi Poetry Slam

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किरदार

By Ritu Barki

देखी सबने ऊंचाइयां मेरे मुकाम की, 
पर किसी ने न देखी गहराइयां मेरे किरदार की।

मंजिलों के करीब पहुंचते देखा जब मुझे,
सबने लगाए कयास अपने आप से, 
किसी ने न सोचा जब चलना शुरू किया होगा
तो किस कदर जीवन जिया होगा।

सबको दिखी तो बस एक मंजिल दिखी,
किसने सोचा के पांव तले कितने छाले होंगे, 
कितनी सर्द सी जिंदगी जी होगी,
कितने ज़हर पिए होंगे और फिर कितना मुंह सीया होगा।

देखा परिणाम सबने, बांधते तारीफों के पुल देखे, 
पर सोचा किसी ने न कि वक्त अपना किस कदर अपने काम को मैंने दिया होगा।।

बहुत आसान होता है यूं उंगलियां उठा देना, 
कुछ भी बोल देना फिर नाम उसको महज मजाक का दे देना,
दूर बैठ के निर्णय देना आसान होता है बहुत, 
पर पास आ के किसी के जूतों में पांव रख के चलो तो पता चले, कैसे कोई समंदर होते हुए भी हालातों के चलते रिया होगा ? 

उठो, बढ़ो आगे तुम भी अपने जीवन में,
किसने मना किया तुमको आगे बढ़ने से, 
मगर यूं खुद को ऊंचा उठाने में किसी को नीचा गिराना, किसी भी स्तर पर अच्छी बात नहीं, बुराई भी करो तो कुछ इस कदर की बातों में कुछ वजन लगे, यूं बेतुकी बातें बनाना, बेवजह किसी को नीचा दिखाना इतना हल्का तो तुम्हारा भी किरदार नहीं।।

जिंदगी के चंद लम्हें मिले हैं जियो खुद भी और औरों को भी जीने दो,
कुछ बनो, उद्यम करो, कार्य को तुम आदित करो, 
कीचड़ मत उछालो दूसरों पे, वक्त का तकाजा है ये, तुम बस खुद को अब साबित करो।।

जितना मिला है तुमको, उतना शायद दूसरों को दिया न हो रब ने, मालिक की रहमतों का शुक्र कर, अपनी रहमतों को ज़जब कर।
होगा कद में तू बहुत बड़ा पर दूसरों के किरदारों का कुछ तो अदब कर।।


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