ख्वाब – Delhi Poetry Slam

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ख्वाब

By Ritika Singh

तू ख्वाब है मेरा, मैं तुझे हकीकत बनाना चाहती हूँ।
तू मंज़िल है मेरी, मैं तुझे पाना चाहती हूँ।

हज़ारों की भीड़ में है तू, मैं तुझे देखकर मुस्कुराना चाहती हूँ।
मैं सब कुछ खोकर सिर्फ तुझे पाना चाहती हूँ।

यूँ तो बहुत सी कमियाँ हैं मुझमें, पर तुझे देखकर सुधरना चाहती हूँ।
बस एक तेरी ही ख़ुशी में मैं खुश होना चाहती हूँ।
क्योंकि मैं सब कुछ खोकर तुझे पाना चाहती हूँ।

तू एक बार साथ तो दे मेरा, मैं पूरी दुनिया से लड़ना जानती हूँ।
क्योंकि मैं सब कुछ खोकर सिर्फ तुझे पाना चाहती हूँ।

तेरे आँसुओं की बहुत क़दर है मुझे,
इसलिए मैं उसे हँसी में बदलना चाहती हूँ।

एक तेरी हँसी को देखकर मैं सिर्फ मुस्कुराना चाहती हूँ।
क्योंकि सब कुछ खोकर सिर्फ तुझे पाना चाहती हूँ।


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