कीमत – Delhi Poetry Slam

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कीमत

By Reema Xaxa

 

 

कुंठित मन आज व्याकुल है
इस कलह से 
अंतरात्मा झकझोर रही है
काया को 
विचलित है 
भ्रमित है
शांत नहीं है
तन हो या मन 
कर रही है सवाल 
हमसे 
क्या मनुष्य खुद को 
ऊँचा समझ बैठा है सबसे 
किया जो हसर उसने सबका 
क्या वह भूल गया 
नहीं है यह सिर्फ उसका 
ऋण तो चुकाना होगा इस 
"विनाश का "
पर क्या कोई 
कीमत लगा सकता है इसका??


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