शून्य से शून्य तक का सफर – Delhi Poetry Slam

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शून्य से शून्य तक का सफर

By Rakhi Upadhyay

शून्य से शून्य तक का सफर आज पूरा हुआ,
आज तक जो कुछ भी मेरा था, वह सब तेरा हुआ।
लेके कौन गया है कुछ भी इस जहां से उस जहां में,
जो कुछ भी समेटा था, वह आज कुछ भी मेरा ना हुआ।
शून्य से शून्य तक का सफर आज पूरा हुआ।

वो सारे रिश्ते, वो सारे लोग बस यहीं तक के थे,
उस जहां तक चलने में कोई मेरा ना हुआ।
ये सारे ढंग, ये सारे रंग, ये सारी ज़माने की बातें,
वो कौन सा सपना था जो मेरा पूरा ना हुआ?
सारी कसमें, सारे वादे बस इसी दुनिया तक के थे,
यहां ऐसा कौन है जिसका सौदा उस जहां तक का हुआ?
शून्य से शून्य तक का सफर आज पूरा हुआ।

सारी घरदारी और दुनियादारी बस इस जहां तक,
मेरा-तेरा, ये ज़माना, और वो चार लोग, बस इस जहां तक।
ऐसा कौन सा बाशिंदा है जो मेरे साथ वहां तक का हुआ?
शून्य से शून्य तक का सफर आज पूरा हुआ।


1 comment

  • Brilliant..Good job rakhi..Keep it up dear..Lots of 💕💕🫡

    Priyanka pandey

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