By Pooja Prajapati
वो मुझे सुकून दे जायेगी
वो मेरे हर दुःख बहा ले जायेगी
वो मुझे तुमसे कही दूर ले जाकर,
तुम्हारे दिल के किसी कोने में छोड़ जायेगी
वो जो अभी रास्तों पर भटक रही हूँ मैं,
मुझे मेरी मंज़िल तक पहुचायेंगी
जो उम्र भर चल-चल कर थक गयी हूँ मैं
वो मेरी हर थकान मिटायेंगी
वो मिलेगी कब, कैसे, क्या पता मुझे?
पर स्पर्श कर सुख का अनुभव तो करायेंगी
वो जो सारी ज़िम्मेदारियाँ जो तुमने दे रखी है मुझे,
वो उन सबसे पीछा छुड़वायेंगी
वो मुझे एक गहरी नींद सुलाकर,
तुम्हारे लिये कुछ सपने छोड़ जायेगी
सपने! जो कभी तुम्हारे होठों पर मुस्कुराहट,
तो कभी तुम्हारी आँखों को नम दे जायेंगे
होंगे तो न तब हम पास तुम्हारे,
फिर भी साथ का एहसास तो करायेंगे
अभी जो तुम हक़ से रोक लेते हो मुझे,
पर तब मैं सुन न पाऊँगी
चाहे कितना भी जोर लगा लेना
पर मैं रुक न पाऊँगी
उस दिन चली जाऊँगी दूर कही
जब अंतिम वेला आयेंगी
जब अंतिम वेला ...........