मन की नौका – Delhi Poetry Slam

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मन की नौका

By Nidhi Jain

ये दुनिया एक सागर बहुत बड़ा,
इस मन की कश्ती को ज़रा संभाल के रखना।

डगमगाए अगर ये मन की नौका,
तो ज़रा समझा देना इसे —
कि ये पल दो पल का तूफ़ान है,
फिर बस आगे अपनी ही शान है।

उस नौका के चप्पू को ज़रा कस के पकड़ना,
यही पार लगाएगा।
इस मन के उत्साह को जगाए रखना,
क्योंकि यही तो मान दिलाएगा।

इस सागर की गहराइयों को
ज़रा जोड़ लेना अपने मन से —
जाना है उसी गहराई तक बस फिर,
ये बुलंदियाँ हमराही बन जाएँगी।

ये दुनिया एक सागर बहुत बड़ा,
इस मन की कश्ती को ज़रा संभाल के रखना।


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