गुण – Delhi Poetry Slam

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गुण

By Neha Talwar Tandon

गुण या अवगुण — मैं कहूं कैसे?
कैसे उस गुण को अहमियत दूँ
जो अवगुण को छुपाता नहीं,
दर्शाता है।

अवगुण अपने ही अंधेरे में
डूबता चला जाता है।

गुण तो गुण तभी है न,
जब वह दूसरे को उभारता है।

गुण तुम में भी है, मुझ में भी,
अवगुण तो हम सब में हैं।

बस करना सिर्फ यह कि
गुण से अवगुण की पहचान करवा देना,
ताकि अवगुण समाप्त होकर
बस गुण ही गुण बिखर जाए।


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