पिता का संघर्ष – Delhi Poetry Slam

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पिता का संघर्ष

By Malwinder Kaur

पिता का संघर्ष कहाँ खत्म होता
हर रोज नया एक वक्त होता.……

सोचते वह हर रोज़ अच्छा कोई वक्त होगा, जब अपने परिवार के लिए राजमहल जैसा वक्त होगा....

भूल जाते वह परेशानी , जब बूरा वक्त होता, खुशी देख अपने परिवार के चेहरे
पर तो अपनी परेशानी का अंत होता..…

जेब में चाहें कम पैसे होते हुए, अपने बच्चों की खुशी के लिए वह भी न्योछावर कर जाते…..

अपनी जरूरत चाहे कितनी हो, अपने परिवार की जरूरत का ध्यान रखने को तैयार हो जाते, अपने सपनों की बलि वह दे जाते ...

माता अपनी गोद में बिठाती, पिता अपने कंधों पर, सपने बच्चों के पूरे हो जाएं यहाँ तक वह हमें प्रेरित करते……

पापा का संघर्ष आगे बढ़ने के लिए प्रोतसाहित करता, प्रस्थिति चाहे कैसी भी हो हिम्मत कभी ना हारना…….

हो तुम एक योद्धा , हर मुश्किल का डट के सामना करना, हार कभी ना हारना, रखना होंसला  खुद पर तुम, संघर्ष से ना घबराना…….

पिता की बात सुनना व समझना,
उनकी जरूरतों का रखो ध्यान तुम
उनका हो तुम असली गहना.….

पिता के साथ समय बिताना
उनके संघर्ष को हमेशा तुम याद रखना..


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