आसमान की बारी – Delhi Poetry Slam

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आसमान की बारी

By Madhuri Chaurasiya


आठ ग्रहों में सबसे प्यारी
धरती मिली हमारी, 
इस पर कचरा खूब किए
अब आसमान की बारी।। 
टिमटिम-टिमटिम चमके सिर पर
औधा मुंह फैलाता, 
जितना ऊंचा दिखता
उससे ऊंचा अहम जताता, 
चले आ रहे ज्ञान पसारे हम
प्रगति किए अविराम, 
जय जयकार लगाते जाएं
जय हो जय विज्ञान, 
किया खोखली मां की गोद
ला दी सौ बीमारी, 
इस पर कचरा खूब किए
अब आसमान की बारी।।। 

ताल, पोखरे,  नदियाँ, सागर, 
शहर, गलियां, गाँव, उजागर, 
अतल वितल भूतल, सब समतल
मेरियाना से उच्च हिमाचल, 
अंगल, मंगल, बुध ,बृहस्पति
शुक्र , शनीश्चर  और
इस पर भी जी नहीं भरा तो
सूर्य देव  की  ओर, 
जगह जगह दूषित कर डाला
ले आए लाचारी। 
इस पर कचरा खूब किए
अब आसमान की बारी।। 

लोहा, सल्फर, एल्यूमिनियम
कैल्शियम और मैगनीज
हीरा, सोना, आक्सीजन
और धोती संग कमीज, 
रहन सहन परिवहन समूचा
मिल जाते सब बारी बारी , 
होती स्पर्धा सब देशों में
उद्योग खड़ा करते लघु -भारी
चलो खोखला चांद करें
सब हो संपत्ति हमारी। 
इस पर कचरा खूब किए
अब आसमान की बारी।। 

हरी भरी वसुधा गति हीन,
 हो जाएगी अगर मलीन
तो अनंत आकाश मिलेगा 
मानव वहाँ फले फूलेगा, 
इच्छाएं असीम इस जग में
काट छाट बढ लो निज मग में
हाँ, विज्ञान सहारा देगा
हर सपना साकार करेगा, 
ऐसी सोच भरी मानवता 
होगी है विनाशकारी। 
इस पर कचरा खूब किए
अब आसमान की बारी।।।


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