साथी ऐसा हो जो साथ निभाए जाए – Delhi Poetry Slam

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साथी ऐसा हो जो साथ निभाए जाए

By Lavisha Bansal 

साथी हो ऐसा जो साथ निभा जाए 
पल दो पल बैठ कर रहा बता जाए 
कुछ मन में हो सवाल तो जवाब बता जाए 
साथी हो ऐसा जो साथ निभा जाए

गलती हो जाए जो हमसे तो हमें माफी दे जाए
कोई बात नहीं डार्लिंग ऐसा कह कर बात संभाल जाए 
साथी हो ऐसा जो साथ निभा जाए

हम पर जवाब ना हो उनके उतने प्यार का 
इतना प्यार कर हमें प्यार करना सिखाया जाए 
साथी हो ऐसा जो साथ निभा जाए

खाना खाकर जो एक बार तारीफ कर जाए 
अरे वाह क्या खाना है ऐसा कह कर हमारा मन बहला जाए 
साथी हो ऐसा जो साथ निभा जाए

कर दे जो सारी उम्र कुर्बान हम पर 
कर दे जो हमारे प्यार का एलान दुनिया भर में 
ना करके भी बहुत कुछ कर जाए 
ना बोलकर भी हमारी बात समझ जाए 
साथी ऐसा हो जो साथ निभाए जाए


1 comment

  • Hello,
    Dear sir/mam,
    I am lavisha bansal,firstly thanks to you for giving me a wonderfull gift to me by the help of this platform.And publish my poem on this platform(delhi poetry slam). Thank you so much.

    Lavisha bansal

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