By Komal Agarwal
तकलीफों की अनगिनत कहानी है,
हर दिल में छुपी एक जुबानी है।
इसका अंदाज़ भी कुछ निराला है,
हर किसी को दर्द का प्याला है।
तकलीफें सबकी अलग-अलग सही,
पर हर जख्म की सूरत एक जैसी रही।
बचपन में खिलौने का न मिलना,
यौवन में प्रेमी से बिछड़ जाना।
परीक्षा में अच्छे अंक न आना,
बेटी की विदाई में मन का घबराना।
रिश्तों का बिखरना, चाहतों का बुझ जाना,
कभी अपनों का दूर देश चले जाना।
हर दर्द का अपना एक रंग है,
पर हर आँख में वही उमंग है।
कहते हैं जीवन का यही स्वरूप है,
दुख में भी छुपा कोई अनूप है।
लड़ना तो पड़ेगा, जीवन जेल नहीं,
मुसाफिर हो, तुम इसके कैदी नहीं।
उतार-चढ़ाव आते-जाते रहेंगे,
हर आँधी में दीपक जलाते रहेंगे।
तकलीफें ही तुम्हें लड़ना सिखाएँगी,
अग्नि में तपकर हीरा बनाएँगी।
Congratulation! ✨
Your poem getting published on Google is not just your success — it’s a voice for many who feel but cannot express. You’ve turned emotions into art, and your words are now healing hearts beyond your own.
So proud of you! 🖋️ 📖 ✨.
Bhut hi sundar .. Dil ko chune wali poetry h ..
Beautiful!
Truly expressed the feelings through words🫶
“What a beautiful creation! The writing is crisp, insightful, and deeply engaging—Komal Agrawal has truly crafted something wonderful here.”
Very nice
Beautiful….
Congratulation bahut Sundar
What a beautiful creation!!
Bhut hi shandar ..