नानी - मेरी रूह का हिस्सा – Delhi Poetry Slam

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नानी - मेरी रूह का हिस्सा

By Khushbu Vandawat

 तेरा हर लम्हा आज भी धड़कता है, 
 तेरा प्यार आज भी मेरी रगों में बहता है।
 
 हमें दूर से देख वो चुरमा बनाती थीं,
 पसंद है मेरे नाते-नातियों को, वो हमें बड़े प्यार से खिलाती थीं।
 
 नानी, आपका वो प्यार और दुलार बहुत याद आता है, 
 आपके जाने के बाद आपके न होने का एहसास बहुत सताता है।
 
 आप ही हर जन्म में मिलें, यही ख्वाहिश है मेरी, 
 आप जहाँ रहो,खुश रहो - यही दुआ है मेरी ।
 
 आपने जिस घर को संभाल रखा था, वो घर अब टूट गया।
 आपने हमेशा साथ रहने का वादा किया था, वो वादा अब छूट गया।
 
 दूर होकर भी मिट्टी में रहते हो हमेशा ही,
 कोई ग़लती हो जाए तो सपनों में आकर कहना हमें।
 
 नानी, आपकी याद बहुत सताती है,
 अब उन यादों के सहारे जीना है, जिनमें आपकी छवि नज़र आती है।


7 comments

  • Lovely and emotinal poem🥹

    Laita
  • Keep it up my child
    God always with you and fulfilled your wishes.

    Sunita choudhary
  • It’s amazing khushboo. I am proud of you.🤞🏻🌼

    Krishna
  • Very nice poem khushboo jiji

    Chetan panwar
  • Excellent

    Yashwant Mehta
  • Nice beta

    Pooja khatri
  • Nice beta

    Pooja khatri

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