जिंदगी – Delhi Poetry Slam

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जिंदगी

By Kavita Singh

इक छलावा है
या दिखावा है
बस भुलावा है
ये जिंदगी

कुछ प्यासी सी
मन की निराशा सी
झूठी सी आशा सी
ये जिंदगी

कुछ कुछ जलती सी
कुछ कुछ बुझती ही
हर पल सुलगती सी
ये जिंदगी


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