दोस्त – Delhi Poetry Slam

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दोस्त

By Kajal Gurbani 

काश कुछ अल्फ़ाज़ मुझे लिखने आ जाएं,
तो दोस्ती के मायनों को हम बता पाएं।

हर कठिन परिस्थिति में जो काम आएं,
अपने सुख-दुख जिनसे हम बाँट पाएं।

कभी हम ग़ुस्सा, तो कभी वो हमसे रूठ जाएं,
कभी करके सुलह हम उन्हें मनाएं।

गलत–सही का एहसास जो कराएं,
ज़िंदगी के हर इम्तिहान में साथ निभाएं।

कभी डांटे, तो कभी फटकार लगाएं,
अच्छे–बुरे का अहसास हमें कराएं।

बिन बोले उसके हम उसे समझ जाएं,
हम एक कहें-वो चार सुनाएं।

दोस्ती की जो मिसाल क़ायम कर जाएं-
काश ऐसे दोस्त सभी को मिल पाएं..!


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