चेहरों के पीछे के चेहरे – Delhi Poetry Slam

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चेहरों के पीछे के चेहरे

By Jinil Mankad

लोग तो वही हैं, लेकिन उनके अंदर के चेहरे बदल जाते हैं,
वक़्त के साथ कहीं अपने भी परायों से बन जाते हैं।

जुड़ते हैं लोग एक-दूसरे से केवल अपने मतलब के लिए,
अरे! उन सिपाहियों को तो देखो, जो जीते और मरते हैं दूसरों के लिए।

जो जैसा है, वैसा कहा देखा हमने,
इंसान को इंसान कहाँ रहने दिया हमने!


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