कभी खुद से भी मिल लिया कर – Delhi Poetry Slam

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कभी खुद से भी मिल लिया कर

By Dr. Punam Kumari

हे नारी , तू कभी खुद से भी मिल लिया कर ।

कभी घर की जिम्मेदारियाँ
कभी बाहर की परेशानियाँ
इस वक्त से कुछ पल तू छल लिया कर ………..
हे नारी , तू कभी खुद से भी मिल लिया कर ।

याद रहती हैं तुम्हें बुजुर्गो की दवाइयाँ
बच्चों के आने वाले इम्तिहान की तैयारियाँ
पड़ी हैं दरारें जो खुद की काया पर
कभी तू उसे भी सिल लिया कर……..
हे नारी , तू कभी खुद से भी मिल लिया कर ।

याद रहता है तुम्हें श्रीमान जी के
चाय और नाश्ता का समय,
घर के राशन का हिसाब किताब करना होता है तय ,
कभी अपने शौकों पर पड़ी परतों को भी गिन लिया कर
हे नारी , तू कभी खुद से भी मिल लिया कर ।

तैरती तो आज भी होंगी सपने ऑंखों मे तेरे
दिल में कोई कसक- सी उठती होंगी आज भी तेरे
थोड़ी थोड़ी ही सही, ख्वाबों का कारवां
तू बून लिया कर …….
हे नारी , तू कभी खुद से भी मिल लिया कर ।


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