Divya Mathur – Delhi Poetry Slam

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बसंत आगमन

By Divya Mathur

 

कलियां चटक कर खिल गईं

बसंत अब छाने लगा

नभ में प्यारी लाली छाई

प्रभात हर्षाने लगा

चिड़िया चहकने लगी पेड़ पर

बीती रात पुष्प दल फूले

उनके ऊपर भ्रमर थे झूले

बसंत खिलखिलाने लगा

पतझर ने विदाई ली धरा से

हवा सुखद बहने लगी

रात छोटी हो गई

मन उपवन महकने लगा

पराग मय हो फूल सारे

प्रकृति रस बरसाने लगी

चेतना जो जड़ पड़ी थी

प्रेमगीत गाने लगी।


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