मां – Delhi Poetry Slam

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मां

By Deepak Sharma

एक मां ही तो संभाले रखती है सारे परिवार को
एक मां ही तो है जो जन लेती है मेरे दिल की हर ख्वाहिश को।
एक मां ही तो है मेरे हर दर्द की दवा,
एक मां ही तो है जो माफ कर देती मेरी हर खता।

मां है तो जिंदगी खूबसूरत है,
मां है तो हर मुसीबत आसान है।

रिश्तों को जोड़ने वाली एक कड़ी है मां,
निश्चल स्नेह से परिपूर्ण है मां।
हर एक की खुशी में ही खुश होती है मां,
कभी भी थकती नहीं है मां।

अथाह प्यार का सागर है मां,
ममता की मूरत है मां।

अब शायद तरसा करेंगे
वो अनमोल पल तुम्हारे बिना मां,
वो न भूलने वाले लम्हे
अब वापस नहीं आएंगे मां।

वो प्यार भरा अपनापन लिए मधुर वाणी आपकी मां,
अब शायद कभी न सुन पाएंगे मां।
क्योंकि तुम अब इस संसार को छोड़कर
चली गई दूसरे संसार के पास
एक नई दुनिया में, सितारों के पास।


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