इजहार ए जिंदगी – Delhi Poetry Slam

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इजहार ए जिंदगी

By Chandan Solanki

ज़िंदगी, तू एक रहस्य, एक कहानी है,
हर मोड़ पर नई समझ, नई रवानी है।

कभी हँसी की बारिश, कभी ग़म की घटा,
तेरे हर रंग में छुपी कोई वज्हा पुरानी है।

चुपके से चलती, किसी गीत सी गूंजती,
कभी ख्वाबों में, कभी हकीकत में पूछती –

"क्या अब भी मुझे वैसे ही चाहते हो?"
हम मुस्कुरा कर कहते हैं, "हाँ, शिद्दत से निभाते हैं।"

तू सिखा गई रिश्तों की परख,
हार में भी ढूंढना जीत की झलक।

कभी अपनों से मिला, कभी खुद से दूर किया,
पर हर बार तूने ही खुद से फिर जोड़ा।

तेरी ठोकरें भी थीं, तोहफ़े की तरह लगीं,
क्योंकि हर दर्द ने कोई सबक जगी।

अब ना शिकवा है, ना कोई गिला,
बस तुझसे मिलने का अंदाज़ नया मिला।

ओ ज़िंदगी, आज तुझसे इज़हार है,
तेरे हर लम्हे से अब हमें प्यार है।

न शिकन है तेरे उतार-चढ़ाव से,
क्योंकि तुझसे ही तो ये सफ़र ख़ास है।


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