सरहद से सैनिक का पत्र, पत्नि के नाम – Delhi Poetry Slam

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सरहद से सैनिक का पत्र, पत्नि के नाम

By Bharti Chourasia

देश प्रेम सर्वोपरि है मेरा, गर्व है मुझे अपने माता पिता पर।
अर्धांगिनी हो तुम मेरी,बेटे का फर्ज निभाना तुम, कि जब मैं शहीद हो जाऊं।
तिरंगे में लिपटा जब मुझे देखोगी तुम।
चीखकर, मुझे पुकारोगी तुम।
मुझको जन्म देने वाली मां, जिसकी आंख का तारा मैं,
उसे गले लगाना तुम।
मेरे नाम से पुकारे जाने वाले मेरे पिता, उन्हें पापा कहकर बुलाना तुम।
अर्धांगिनी हो तुम मेरी बेटे का फर्ज निभाना तुम, कि जब मैं शहीद हो जाऊं।
बेशक दौलत का नहीं लालच उनको,पर मेरी वर्दी,मेरे फोटो, मेरे तमगे, उन्हें सजना तुम।
बेशक हक है तुम्हे कि तुम अपनी मांग में भर लो किसी और के नाम का सिंदूर,पहन लो मंगलसूत्र, कि जब मैं शहीद हो जाऊं।
पर हां , याद रखना, वो हमारी बगियाँ का फूल वर्ष मैं एक बार उसे दे देना मेरे मात, पिता के चरणों की धूल, ना दौलत की चाह, ना शोहरत की चाह, कुल का दीपक देख बूढ़ी आँखें खुश हो जाएगी।
मेरी परछाई पोते में देख, जिंदगी कट जाएगी।
इतनी सी अर्जी है मेरी, की जब मैं शहीद हो जाऊं।
अर्धांगिनी हो तुम मेरी, बेटे का फर्ज निभाना तुम कि जब मैं शहीद हो जाऊं।
की जब मैं शहीद हो जाऊ ।


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