By Ashwini Gutte
गुमशुदा से इस दिल की
ख्वाहिश ईक गुमनाम सी है,
पता नहीं...
ये भी कुछ चीज मेरी अपनी सौ है
या
वक्त की ही और कोई
साजिश हसीन सी है,
बेह जाऊं उस वक्त की नादानी में
आरजू कुछ ऐसी है,
मगर मेरे युं बेह जाने से भी
किस्मत को कुछ तकरार सी है,
मेरी हकीकत और मेरे सपनों के बीच की
ये जंग कुछ पुरानी सी है,
जीत जाऊं अब ये जंग मैं
मेरी भी ज़िद कुछ ऐसी है,
ईक कर जाऊं -
हकीकत और सपनों के वोह दो जहान
चाहत कुछ ऐसी है।
जबरदस्त..!!