किताब – Delhi Poetry Slam

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किताब

By Arpit Hatila

आओ पढ़े एक किताब
किताब मेरी जिंदगी
कुछ पन्नों में खामोशी
कुछ पन्नों में दिल्लगी

(1)
बातें बड़ी बड़ी
रातों का चमन
अंधेरे की रोशनी
आंखों का जतन
जतन जतन हैं कई
शिकन शिकन हैं कई
कई सिलवटों से भरी
कहानी यह जिंदगी
कुछ पन्नों में खामोशी
कुछ पन्नों में दिल्लगी

(2)
प्रेम रस एक है
एक मोह त्याग से
त्याग सच मांगता
सच से हम भागते
छिपे छिपे रहे सदा
यदा–कदा की बात में
आज खो दिए जिसे
कल मिले वो जिंदगी
कुछ पन्नों में खामोशी
कुछ पन्नों में दिल्लगी

(3)
कुछ राज़ हैं, कहे नहीं
पर जो कहा, सुना कोई?
बदल गए चेहरे कई
पन्नों के पलटते ही
सिसक कहीं, कहीं खुशी
कहीं तनाव से सजी
फूलों के बाग़ में
पत्तों सी जिंदगी
कुछ पन्नों में खामोशी
कुछ पन्नों में दिल्लगी


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