Anonymous – Delhi Poetry Slam

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Pakh Ishq

By Anonymous

ये प्यार है क्या या है कोई उफान
दिल की गहराइयों में क्यू है तूफ़ान
ए खुदा दे कोई सिला, मेरी मोहब्बत का
और ले मुझे थाम.

हे ये अरमान दिल का है,
आये वो शाम
बस हो तू संग मेरे और वो
और ना हो कोई दरमियान.

बस मेहसूस करु यूसे
और वो मुझे,
बन जाए वो मेरी,
और मैं उसकी पहचान।

थाम के उसको, बस बैठी रहु
और कर दू अपना हाले दिल ब्यां
है इंतज़ार हर लम्हा उस पल का
ना जाने कब पूरा हो अपना ये अरमान

ये तो है तुझे तो पता, ए खुदा
चाहु उसे में कितना,
है वो मेरे इस दिल की जान।


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