By Archit Thakur
कुछ तो अंजना सा सफ़र था,
ना कोई दिशा ना ही कोई हमसफ़र था।।
नए रोज़, नए सपने भी थे
थोड़ी घबराहट, और गुदबुदाहट होठों पर थी
और सैंग एक चहकती मुस्कुराहट भी थी,
इस अनजाने से राह में,
कुछ चेहरे थे मिले,
थोड़े दुखी थोड़े सूखी
अब चले हम कुछ पाने की चाह में सभी
मिलके ख़ुदसे उन लोगो में,
मैं भी चल पड़ा किसी सफ़र में तभी,
अब इस अँधेरे में मिली थी रोशनी कोई ।।
फिर भी थोड़ी झिझक थी मगर, उन मुलाक़ातों में
साथ लिए चले हम सब अपने बोझों की नमी
संग एक डगमाती सी नाव में,
जीवन के छोटे पथराव में
जो थे अनजान से चेहरे, लगते हैं वो अब यार कोई
साथी चले सफ़र में सैंग जो थे
कुछ दफ्तर की सिलवटों में,
कुछ शामों के रियाज़ों में,
पा लिया था फिरसे खुदको मैंने।।
अब बीत गए कुछ साल वो,
सैंग दिल में चले कुछ मलाल दो।।
कई ने तो गुमानी दिकलायी,
बाकियों ने मस्ती सिखलायी,
एक पाल को चले थे साथ जो,
अब वो भी बढ़ चले हैं अंजनी सी राह को
था जो सफ़र जाना पहचाना,
बीता क्यों पल जो सुहाना,
कुछ आए चेहरे कुछ ले के बहाना
कहने लगे चलो यार, अब है हमे नया
सफ़र जो अपनाना।।
ना जाने क्यों सब खड़े थे स्तब्ध,
आँखों में थी कुछ नमी थी मगर,
कहने को ना कुछ थे शब्द ।।
थे अब सब अनजाने में हम
फिरसे इस अनजाने से सफ़र की
ओर बड़े क्यों सबके सब
बढ़ते देख हमारे साथी को,
सोचा खुश तो थे हम सब
बस मन में एक सवाल सी थी,
नजाने हम फिर मिलेंगे कब?
फिर एक रोज़, हम सब
थोड़ी घबराराहट थोड़ी गुदबुदाहट लिए
अनजाने में चले नए सफ़र की ओर
थोड़े दुखी थोड़े सूखी
अब चले हम कुछ पाने की चाह में सभी,
फिर अंजनी सी सफ़र में बढ़े चले,
सवाल थे ज़हन में कई,
फिर हम सबने डर के सोचा
आओ देखे, कहाँ ले जाता है सफ़र अभी