ज़िंदगी, तू किताब सी लगे – Delhi Poetry Slam

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ज़िंदगी, तू किताब सी लगे

By Anjali R Meena 

ज़िंदगी, तू किताब सी लगे

पन्नों पे तुझे लिखती हूँ मैं,
लम्हों में जीती हूँ तुझे।
हर अक्षर में बसती है तू,
ए ज़िंदगी, तू किताब सी लगे।

कई पन्ने अभी भी खाली हैं,
कुछ पर पुराने निशान बाक़ी हैं।
गुज़रे लम्हे स्याही से ज्यों दर्ज हुए,
ए ज़िंदगी, तू किताब सी लगे।

हाथ थामे तेरे किस्सों का,
यादों के गुलाब सजाती हूँ मैं।
वो दिल कभी थमता ही नहीं,
जब तू मुझमें बहती है चुपचाप।

दिल में कई अधूरे ख़्वाब हैं,
पर उम्मीदों की स्याही तेज़ है।
ए ज़िंदगी, तू किताब सी लगे।

रुक ज़रा, थम ज़रा,
कुछ नए पन्ने लिखने हैं अभी।
हर मोड़ पे इक कहानी छुपी है,
ए ज़िंदगी, तू किताब सी लगे।

बरसती है बारिश बनकर कभी,
आँखों से छलकती यादों की तरह।
तेरे पन्ने भी भीग जाते हैं,
ए ज़िंदगी, तू किताब सी लगे।

कभी तू रंगीन त्योहारों सी चमके,
कभी अनकहे सपनों सी सादगी में लिपटी।
तुझे जितना देखूँ, उतना खो जाऊँ,
ए ज़िंदगी, तू किताब सी लगे।

मौसम बदलते हैं, लोग भी बदलते हैं,
पर तू हर पन्ने पे नए सबक छोड़ जाती है।
हर शब्द में एक अर्थ छुपा है,
ए ज़िंदगी, तू किताब सी लगे।

जहाँ कोई नहीं, वहाँ भी तू है,
पन्नों में, लफ्ज़ों में, ख़ामोशी में।
तेरे किस्से मेरे अपने हो गए हैं,
ए ज़िंदगी, तू किताब सी लगे।

हर पन्ना सच के करीब लाता है,
हर लम्हा नई कहानी बनाता है।
ए ज़िंदगी, तू किताब सी लगे।


1 comment

  • PRECIOUS🛐

    Hunny

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