सुन वहशी – Delhi Poetry Slam

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सुन वहशी

By Alka Agarwal

ठहर, ठहर....
मेरे काली बनने तक...
तेरे मन का सारा कालापन 
हिरन हो जाएगा....

ठहर, ठहर....
मेरे मादक होने तक...
तेरा सारा नशा 
हवा हो जाएगा.....

ठहर, ठहर....
मेरे क्रोधी होने तक....
तेरा सारा अट्टहास 
सदमा हो जाएगा.... 

ठहर, ठहर....
मेरे भयमुक्त होने तक.... 
तेरा हर पल 
भययुक्त हो जाएगा....

सुन वहशी 
बस मरने दे 
मुझमें से मेरी स्त्री 

ठहर-ठहर... 
मेरे काली बनने तक.... 

तेरा मुण्ड 
मेरी माला का 
हिस्सा हो जाएगा 

ठहर, ठहर....
मेरे काली बनने तक...
तेरे मन का सारा कालापन 
हिरन हो जाएगा 


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