नव-पीढी की धरोहर स्वर्णिम भारत – Delhi Poetry Slam

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नव-पीढी की धरोहर स्वर्णिम भारत

By Akansha Chachra

नव-पीढ़ी की धरोहर – स्वर्णिम भारत

भारत की माटी कहे पुकार,
संस्कारों की हो जय-जयकार।
ज्ञान-विज्ञान से जो नाता जोड़े,
नव पीढ़ी का दीपक जो ठहरे।

वेदों की गूंज हो हर श्वास में,
शौर्य बहे हर इक बात में।
हर बालक बने सच्चा वीर,
राष्ट्र हो जिसका अंतिम पीर।

आओ गढ़ें मिलकर वो कल,
जहाँ न हो जात-पात का दल।
जहाँ नारी हो सबसे महान,
और शिक्षा बने देश की जान।

तकनीक में हो जिसकी पहचान,
पर संस्कृति न हो कभी अनजान।
बापू की अहिंसा, भगत का जोश,
हर दिल में हो भारत का होश।

हर खेत लहराए हरियाली,
हर गाँव में हो रोशनी वाली।
युवा बनें शक्ति की मिसाल,
कर्तव्यों से करें हर हाल।

धरोहर हैं हम, ये याद रहे,
भारत मां से हर नाता गहे।
संघर्षों से हो न डरे भारत,
सपनों को करें साकार भारत।

आओ रचें हम ऐसा इतिहास,
जिस पर करे विश्व भी विश्वास।
नव पीढ़ी ले संकल्प महान –
"स्वर्णिम भारत" हमारी पहचान।


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