मातृत्व – Delhi Poetry Slam

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मातृत्व

By Aarti Goutam

निर्मल हृदय विचारों मे ममता किसमे इतनी क्षमता है, 
रोम रोम मे वात्सल्य भरा है, कोई ऐसा भी हो सकता है। 
   उनके स्नेह का जोड़ कहा है, जो गद्दगद ही सदा रहती है, 
मेरी कोई कमी पेशी जिनको दिखाई नहीं देती है। 
   लगता हैं मुझे अर्जुन है वो, जो नींद पराजित कर आई है, 
ये मातृ प्रेम की कैसी धुन है, एक बालक में सृष्टि समायी है। 
  मुझे लगता है जब सांचा लेकर,  ईश्वर माता गढ़ता होगा, 
गीता ,कुरान और प्रतेक धर्म ग्रंथ साथ ही साथ वो पढ़ता होगा।


1 comment

  • Written by me ☺

    Aarti Goutam

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