मिर्ज़ापुर – Delhi Poetry Slam

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मिर्ज़ापुर

By Prabhat Patel

 

हे विंध्य की माता , ज्ञान की देवी
अष्टभुजा में बसने वाली
हमको ज्ञान तू दे।
गंगा के तू तट पर बसकर , असीम सुंदरता में रमकर
विंध्य ,अरावली,नीलगिरी से घिर कर, बना है यह पावन दिव्यस्थल
हमको सद्गुण दे।
हे मां विंध्यवासिनि , तेरे इस गुरुकुल से
मिले ज्ञान का दिव्य पुंज ,जो कर दे रोशन कूल कुंज
ऐसा वर तू दे।
लेकर यहां से ज्ञान अभी, न हमसे हो कोई खता कभी
करें राष्ट्र निर्माण सभी, पूरा होगा उद्देश्य तभी
ऐसा प्रण तू दे।
गुलाबी पत्थर से मिलकर, बना है यह मिर्ज़ापुर स्थल
विभिन्न दरियों से निकलकर, बना है यह मां विंध्यवासिनी का ज्ञान स्थल
हमको सन्मति दे।
अमीरजादों की यह हद है, गंगा के दाहिने उनका तट है
जहां बसा कैमूर अभ्यारण है, जिसमें रहता काला हिरण है
हमको आश्रय दे।
यहीं अमरावती से , देश को मानक समय है मिलता
जहां मां विंध्यवासिनी के ज्ञान का यह कमल है खिलता
हमको समृद्धि दे।
यहीं बसा है राजा भर्तृहरि का चुनार किला
जहां के पत्थर से ही है हमको राष्ट्रीय चिन्ह मिला
हमको सद्गति दे।
गुलाबी पत्थर से मिलकर, बना है अयोध्या का तीर्थस्थल
यहीं के पत्थर से मिलकर , बना है बौद्ध- अशोक का प्रतीक स्थल
हमको प्रतिफल दे।
हे विंध्य की माता, ज्ञान की देवी, हमको ज्ञान तू दे।।


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