में हूँ शोषण मीडिया। – Delhi Poetry Slam

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में हूँ शोषण मीडिया।

By Nikhil Tewari

में हूँ शोषण मीडिया।

में मानसिक दिवालियापन हूँ

विचारों का चीरहरण हूँ

शब्दों का कुपोषण हूँ

में सोशल नहीं में शोषण हूँ। 

 

में सुनता कम हूँ

बोलता ज्यादा हूँ

में सोचता कम हूँ ।

लिखता ज्यादा हूँ। 

 

जहाँ बात गहरी है वहाँ दुनिया बहरी है

1 मिनट की Reel में पूरी दुनिया मेरी है। 

 

यहाँ पैदा हुई ज़मात नयी 

कुछ यूटूबर कुछ टिकटॉकर ।  

 

ये आज के खलनायक 

ईगो सटिस्फायक़  

शून्य से सन्न हो जाते है

बुखार कुछ ऐसा है

लाइक शेयर कमेंट से Viral हो जाते है। 

 

ये बाशी कोई अख़बार नहीं 

पल में भविषय दिखाते है 

कल जो करना था इनको , उसका आज Status लगाते है। 

 

ये Casual है   

Unusual है  

ये Virtual है  

 

जिसकी हर बात मे एक Sarcasm है

हर जगा छाया है 

सबकी नशों में इसका Orgasm है। 

 

यहाँ लोग Hashtag से जाने जाते है

दो रूपये की चीज़ को 100 का दिखाते है

दान भी देते है सेल्फी भी खीचाते है। 

 

इस ब्रह्नमणड में भ्रम का Scene है 

ना इसकी दवा ना कोई Vaccine है 

Reel से Real जाने में ही समझदारी है 

ये Corona से बड़ी महामारी है ।


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