सवाल कर! – Delhi Poetry Slam

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सवाल कर!

By Abhimanyu Kumar

ज़िंदा है, तो सवाल कर।
ज़ुबान है, तो सवाल कर।
विवेक का प्रयोग कर, सवाल कर।
चित को शांत कर,
फिर चिंतन कर,
तब सवाल कर।
अगर नहीं हो तुम बस एक चलती लाश, तो सवाल कर।

भ्रम मिटाना है, तो सवाल कर।
समय मत बर्बाद कर, सवाल कर।
गलतियाँ सुधारने हेतु, सवाल कर।
उपलब्धियाँ हेतु, सवाल कर।
क्रांति हेतु, सवाल कर।

जिज्ञासा है, सवाल कर।
क्यों ब्रह्मांड ऐसा, सवाल कर।
क्यों जीव ऐसा, सवाल कर।
खुदा कैसा, सवाल कर।
खूबसूरती क्या, सवाल कर।
प्यार क्या, सवाल कर।
न्याय क्या, सवाल कर।
नफ़रत क्यों, सवाल कर।
भेदभाव क्यों, सवाल कर।
इतना समझ कर रुक मत, और सवाल कर।

सवाल उठा मत – अंतर समझ – सवाल कर।
गरिमा में रहकर, सवाल कर।
ज़मीर को जगादे, ऐसा सवाल कर।
अंजाम का भय मत कर, सवाल कर।
आवाज़ बुलंद कर, सवाल कर।
जिंदा है, तो सवाल कर।


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