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ये कम्भख्त भारिश

BY L VASUDEVAN

प्यार किस चिड़िया का नाम हैं
ये मैं नहीं जानता 
मैं तो एक सूखा पेड़ हूँ
एक चिड़िया भी ना पंख फड़फड़ाये
सोचता हूँ कभ मर जाऊं 
मगर यह कम्भख्त भारिश
हमेशा मेरे मरने से पहले आ जाती हैं 


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