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Vikalp

Sukanya Mukherjee

मैंने बहुत सोचा

पर मेरा और कोई विकल्प नहीं

दूर जाने से

अनजाने

तो बनते नहीं 

भूलते हैं 

दिलों की गरमाहट

तुम्हारे होने के सुकून से

तुम्हारे होने वाले 

दिन भी गुज़रजाते हैं

मैंने बहुत रोका

पर मेरा और कोई विकल्प नहीं

तुमसे इश्क़ करने के सिवा

कोई विकल्प नहीं

यह इश्क़ निभाने के सिवा 


2 comments

  • तुम्हारे होने के सुकून से का क्या विकल्प है ?????????

    Siddharth Sharma
  • Nice poem, there’s so much honest emotion in it!

    Sahitya

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