मुस्कान – Delhi Poetry Slam

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मुस्कान

सौमयम शरण
चेहरे पर मुस्कान है,
बस चेहरे पर मुस्कान है।
उर को कचोटती हर तान है,
गीतों में रस की कमी,
हृदय आज अशांत है।
पर चेहरे पर मुस्कान है,
बस चेहरे पर मुस्कान है।।
भय है आज सत्य का,
जय है, पर असत्य का।
धर्म की है बुझती लौ,
काल आज महान है।
पर चेहरे पर मुस्कान है,
बस चेहरे पर मुस्कान है।।
दरिया ताप से है जल रही,
सत्य पैदल ही है चल रही।
कायर जैसे स्वर्ण,
आज वीर धूलि के समान है।
पर चेहरे पर मुस्कान है,
बस चेहरे पर मुस्कान है।।
नदियों में प्रेम के
हवस का रंग है चढ़ रहा,
जात वर्ण के नाम पर
मूर्ख है बढ़ रहा।
ज्ञान का नहीं गुणगान है,
पर चेहरे पर मुस्कान है,
बस चेहरे पर मुस्कान है।
छल, प्रपंच आज आम है,
चारों ओर बस कोहराम है।
प्रीत बिकती कौड़ियों में,
शोषण सरेआम है।
बाजारों में बिकता, मृत्यु का सामान है,
क्षीण होती जान है।
पर चेहरे पर मुस्कान है,
बस चेहरे पर मुस्कान है।

1 comment

  • Nicely written
    Keep it up

    Kajal

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